Tuesday, January 19, 2021

जानिए काँच के सहायता से एक शिशु का जनन कैसे होता है।

 जानिए काँच के सहायता से एक शिशु का जनन कैसे होता है- इससे पहले जानते हैं कि स्त्री गर्भाशय में शिशु निर्माण कैसे होता है।

आम दौर पे आप सब जानते है कि महिलाएं में गर्भसय का प्रारंभ और अंत तक का सफर में पुरे 9 महिने का समय लगता है।

इससे पहले कोई महिला जब गर्भवती होती है तो उस समय उसके गर्भ अवस्थाये कब और कैसे होता है आईए इसके बारे में आपको कुछ गंभीर जानकारी देता है।

स्त्री और पुरुष का संबंध- आप जानते हैं कि कोई महिला गर्भवती तब होती है जब वह किसी पुरुषके साथ संबंध बनाता है, यह गर्भवती या शिशु जनन के लिए अति आवश्क होता है। https://www.linkedin.com/in/bollywood-news-today-438886202

जब एक महिला मां बनने के लिए तैयार होती है तो उसे इस बात का पुरा ध्यान होता है कि उसके मासिक के ठीक पांच दिन पहले या पांच दिन के आगे य ठीक ठीक उसके पुरूष के साथ योन संबंध बनने होता है। ऐसा इस लिए करना चाहिए या इसका अवश्कक होता है। क्योकि उस वक्त पुरुष का शुकरु से स्त्री का अंडाणु से मेल हो जाता है, इन दोनों के मेल से स्त्री के गर्भ एक शिशु का निर्माण होने की पिर्किया शुरू हो जाती है। फिर धिरे-धिरे स्त्री गर्भ मे शिशु का अंग विकसित होने लगता है। इस प्रकार एक पुष्प शिशु अंग का विकास होने मे पुरे 9 महिने लग जाता है।


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काँच के उपयोग से शिशु का जनन-

आप क्या जानते हैं कि एक शिशु का जनन स्त्री गर्भ के बिना भी हो सकता है।


सायद आप सब मे से ये बात कुछ लोगो को पता होगी और जो लोग नहीं जानते हैं, तो चलिए आइए इसके बारे में बताते हैं।

दरासल यह बात सच है कि एक कच्छ के सहायता से हम शिशु का जनन कर सकते है, इसके उत्पति शरीर से बाहर कृमीकरण (वियोजन निषेध) जिसे संक्षिप्त मे IVF कहा जाता है। यह प्रिक्रिया इसका व्दारा होता है। प्रिक्रिया मै अंडाशय से अंडाणु के बाहर निकलने की क्रिया कोशाओण व्हदारा नियंत्रण किया जाता है। इसमे स्त्री के अंडाशय से अंडाणु को निकालकर एक तरल माध्यम मे शुकर विषाणु वडारा इसकी संलयन निर्मित हो जाता है। इसके बाद सफल गर्भाधान को स्थापित करने के लिए लगभग एक वर्ष तक विकसित किए गए युग्मनज को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया गया है।]]]


यहाँ पुष्पक विकास होता है और शिशु का जनन समान्य शिशु की तरह ही होता है।

क्या आप जानते हैं कि विश्व पहले सफल काँच के उपयोग से शिशु का जनन 'लुईस ब्रू' का जन्म सन् 1978 को इस परिक्षन के व्दारा हुआ था, या भारत मे पहला परिक्षण दुर्गा का जन्म विश्व के पहले शोनली शिशु के जन्म के 67 दिनो के लिए। ।। बाद में हुआ था।

इनको विक्षेपनली शिशु (एक मिथ्या नाम) इसलिए कहा गया क्योकि 'इन विर्टो' शब्द लैटिन का मुल शब्द माना जाता है जिसका अर्थ 'काँच के भीतर होता है, जबकि शिशु का विकास जोनली मे नहीं होता है।


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जानिए काँच के सहायता से एक शिशु का जनन कैसे होता है।

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